भगवान राम का जीवन परिचय, परिवार, गोत्र, शिक्षा, पत्नी, वनवास, पुत्र, मृत्यु

Bhagwan Ram Biography In Hindi: भगवान राम, हिंदू धर्म के प्रमुख देवताओं में से एक हैं और उनकी जीवन कथा को “रामायण” के रूप में बताया गया है।

उनका पूर्णा नाम “राम” था और वे विष्णु भगवान के एक अवतार थे। भारतवर्ष में भगवान राम की चारों तरफ पूजा की जाती है। ऐसे में कई लोगों को भगवान राम के जीवन के बारे में विस्तार से नहीं पता होता है, और वह उनके जीवन के बारे में जानने के लिए इच्छुक होते हैं।

ऐसे में इस लेख के द्वारा आप Ram Biography In Hindi के बारे में विस्तार से जान सकते हैं। इस लेख में हमने भगवान राम के बचपन से लेकर अंतिम समय तक की पूरी कहानी को बताया है जिसे पढ़कर आपको इनके जीवन के बारे में सभी बातें समझ आ जाएगी। अगर आप भगवान राम के जीवन के बारे में जानना चाहते हैं तो नीचे दिए गए लेख को ध्यान से पूरा पढ़े।

भगवान राम का जीवन परिचय | Bhagwan Ram Biography In Hindi

राम का जन्म और बचपन

भगवान राम का जन्म अयोध्या नागरी में हुआ था। उनका जन्म 7वीं शताब्दी में, त्रेता युग के द्वापर कल में हुआ था। राम के माता-पिता का नाम राजा दशरथ और महारानी कौशल्या थे। उनके जन्म की कथा रामायण में व्यक्त है।

राजा दशरथ की तीन पत्नियाँ थी – कौशल्या, कैकेयी, और सुमित्रा। भगवान राम कौशल्या से उत्पन्न हुए थे। उनके जन्म के समय, अयोध्या में एक विशेष यजञा किया गया था, जिसके मध्यम से भगवान विष्णु ने राम के रूप में जन्म लिया। इस कारण से भगवान राम को “मर्यादा पुरुषोत्तम” कहा जाता है।

भगवान राम का बचपन अयोध्या के राजमहल में व्यतीत हुआ। उनकी माँ कौशल्या ने उन्हें प्रेम से बड़ा किया, और वे एक आदर्श पुत्र बन गये। उनका गुरुकुल में अध्ययन हुआ, जहाँ उन्होने वेद, शस्त्रा, और धनुरविद्या का अभ्यास किया। राम के साथ उनके भाई लक्ष्मण, भरत, और शत्रुघ्ना भी गुरुकुल में रहे।

राम के बचपन का एक प्रमुख घटना उनके बाल-लीलाओं में से एक है, जिसमें उन्होने एक भारी धनुष को तोड़ दिया था। सीता के स्वयंवर में, जो राम जीत गये, उन्होने शिवा धनुष को स्वयं तोड़ा, जिसके कारण उन्हें सीता से विवाह का अधिकार प्राप्त हुआ।

भगवान राम का बचपन उनके आदर्श व्यवहार, शिक्षाओं, और धार्मिक विचारों से भरा हुआ था। उनका जीवनपथिक बचपन उनके वंशजों के लिए एक आदर्श स्थल बन गया, जो उनके मर्यादा पुरुषोत्तम आचरण को देखार प्रभावित होते हैं।

राम का विवाह

भगवान राम का विवाह सीता के साथ स्वयंवर के रूप में हुआ है, जो की रामायान के प्रसिद्ध एपिसोड में व्यक्त है। यह घटना अयोध्या के राजमहल में हुई थी।

भगवान राम ने अपने बाल-लीलाओं और धार्मिक मह्तव के कारण अयोध्या के राजा दशरथ के प्रिय पुत्र के रूप में विख्यात हुए थे। एक समय, राजा जनक (मिथिला के राजा) ने अपनी यगया भूमि को आरतक किया था, जिसमें उन्होने एक सुंदर कन्या को प्रकट किया। यह कन्या सीता थी, जो भगवान विष्णु के अवतार भगवान राम के लिए प्रेरित हुई थी।

जनक राजा ने स्वयंवर का आयोजन किया, जिसमें सीता के विवाह के लिए अलग-अलग राज्यों के राजा और माहराजा उपस्थित थे। स्वयंवर में, एक विशेष धनुष को तोड़ने पर ही सीता से विवाह करने का अधिकार मिलता। कई राजाओ ने प्रयास किया, लेकिन कोई भी धनुष को तोड़ नही पाया।

फिर भगवान राम अयोध्या के राजकुमार और दशरथ के पुत्र के रूप में स्वयंवर में उपस्थित हुए। राम ने शिवा धनुष को स्वयं तोड़ा, जिसे सभी राजाओ ने आसान नही माना था। इस कारण से सीता का विवाह राम से संपन्न हुआ।

इसके बाद, राम, सीता, लक्ष्मण, और हनुमान जी साथ में अयोध्या लौटकर आए, लेकिन उनके जीवन में अनेक समस्याएं आई, जैसे की रावण का वध, सीता का अग्नि परीक्षा, और वनवास। भगवान राम का विवाह सीता के साथ उनकी प्रेम कथा और मर्यादा पुरुषोत्तम धर्म के प्राचीन इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

राम का वनवास

भगवान राम का वनवास रामायान के एक प्रमुख एपिसोड में है। दशरथ महाराज के राज्याभिषेक के तुरंत बाद, कैकेयी के इच्छा अनुसार, भगवान राम, सीता, और लक्ष्मण को वनवास जाना पड़ा।

कैकेयी ने दशरथ से दो वरदान माँगे थे, जिनके परिणाम स्वरूप भगवान राम को वनवास जाना पड़ा। वरदानों के अंतर्गत, राम को 14 वर्ष तक वनवास में जाना था और उनका राज्य त्याग करना था। दशरथ महाराज ने अपने वचन को पूरा करने के लिए और उनकी पत्नी कैकेयी की इच्छा को सम्मान देने के लिए राम ने वनवास का विरोध नही किया।

भगवान राम, सीता, और लक्ष्मण ने वनवास का निर्णय लिया और अयोध्या से वन को प्रस्थान किया। उन्होने अपने वनवास का क्षेत्र चित्रकूट में चुना, जहाँ उनका अनेक वर्ष तक आश्रम बसा रहा। इस दौरान, भगवान राम ने वनवास के कई भागियों और रक्षासों से संवाद किया, धर्म और न्याय की रक्षा की, और अनेक तपस्याओं में व्यस्त रहे।

वनवास के समय, रावण ने सीता का अपहरण किया, जिसके परिणाम स्वरूप भगवान राम ने लंका यात्रा की और रावण का वध किया। इसके बाद, राम, सीता, और लक्ष्मण अयोध्या लौटकर राज्याभिषेक के लिए प्रस्थान किए।

भगवान राम का वनवास उनके जीवन का एक महत्पूर्ण खंड है, जिसमें उन्होने धर्म, कर्तव्या, और मर्यादा को पालन करते हुए संवेदनशीलता और त्याग का उदाहरण प्रस्तुत किया। उनका वनवास उनके भक्त और सिश्‍यों के लिए एक आदर्श और ज्ञान का स्रोत बन गया।

राम का लंका यात्रा और रावण वध

भगवान राम का लंका यात्रा और रावण वध, रामायण के एक महान खंड को दर्शाता है। यह घटनायें सीता का अपहरण, हनुमान जी की लंका प्रवेश, और रावण का पराजय को अभिप्राय करते हैं।

सीता अपहरण

एक दिन, रावण, लंका के राजा, ने सीता का अपहरण किया। रावण ने एक विशेष रूप में विभीषण के भेष में जा कर सीता को भटकने का बहाना बनाया और उसे अपने अशोक वन में लाया।

सीता, भगवान राम का धार्मिक पतिव्रता रूप, रावण के प्रबंधन में रही, लेकिन उसने राम का नाम और प्रेम कभी नही छोड़ा।

लंका यात्रा

भगवान राम ने सीता का अपहरण सुना और उन्होने वनवासी जीवन में लंका तक पहुँचने का फ़ैसला किया। उनका सहायक, भगवान हनुमान, लंका में पहुँचा और सीता से मिला। हनुमान ने अपने बाल और भक्ति से सीता का आश्वासन दिया और राम का संदेश लौटाया।

इसके बाद, भगवान राम, लक्ष्मण, हनुमान, और वानर सेना ने सेतु (सेतुबंधन) बनाने के लिए समर्पण किया। सेतुबंधन के दौरान, भगवान राम ने अपने दिव्या बणों और आस्ट्रास का उपयोग किया। सेतु बनाने के बाद, उन्होने लंका की ओर बढ़ना शुरू किया।

रावण वध

महा युध के दौरान, भगवान राम और रावण ने एक दूसरे के साथ भारी युध किया। रावण की शक्ति के कारण, युध मे उत्तराधिकारी बना, लेकिन हनुमान जी की सहायता और विभीषण के मार्गदर्शन से राम ने रावण को परास्त किया। भगवान राम ने रावण को अपने बणों से घायल किया और उसका वध किया।

रावण के वध के बाद, सीता का अग्नि परीक्षा ली गयी, जिसमें उनकी पतिव्रता भावना को साबित किया गया। भगवान राम ने सीता को अपने चरण छूने का अधिकार दिया, लेकिन उसने अपने पतिव्रात्या को और एक बार दिखाया।

भगवान राम, सीता, लक्ष्मण, हनुमान, और वानर सेना लंका से अयोध्या वापस लौटकर राज्याभिषेक के लिए प्रस्थान किए। लंका यात्रा और रावण वध रामायण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें धर्मा, प्रेम, और कर्तव्या की महत्वपूर्ण शिक्षा मिलती है।

राम का अयोध्या लौटकर राज्याभिषेक

भगवान राम का अयोध्या लौटकर राज्याभिषेक रामायण के अंतिम कांड में बताया गया है। लंका यात्रा के बाद, भगवान राम, सीता, लक्ष्मण, हनुमान, और वानर सेना अयोध्या की ओर लौटकर शुरू किए थे। उनकी आगमन की खबर अयोध्या पहुँची, और पूरी नागरी उनके स्वागत में व्यस्त थी।

राजमहल में, भगवान राम ने अपने पिताजी राजा दशरथ के प्रतिकूलक रूप में सिंहासन पर बैठकर राज्याभिषेक किया। अयोध्या के लोगों ने उनके आगमन पर आनंद और प्रेम का इज़हार किया। भगवान राम का राज्याभिषेक धर्म, न्याय, और समृद्धि के मूल्यों पर आधारित था।

इस अवसर पर, भगवान राम ने अपने भाइयों लक्ष्मण, भरत, और शत्रुघ्ना को भी महत्वपूर्ण पदों में स्थापित किया। उन्होने अपने वनवास के समय उनकी भक्ति, प्रेम, और समर्पण के लिए उन्हे बहुत ही प्रशानशा दी। भरत को अयोध्या का उपराज बनाया गया था, जबकि शत्रुघ्ना मथुरा के अधिपति बने थे।

भगवान राम ने अपने राज्य में “राम राज्य” की स्थापना की, जो एक आदर्श राज्य का प्रतीक है। राम राज्य में धार्मिक संवेदना, न्याय, और सामरिद्धि व्याप्त थी। हर व्यक्ति को सम्मान और अधिकार मिलते थे, और समाज में सभी वर्गों को समावेषित किया गया था।

भगवान राम के राज्याभिषेक ने अयोध्या को सुखी, संपन्न, और धार्मिक राज्य बनाया। उनका आदर्श और व्यवहार सभी के लिए प्रेरणा स्रोत बन गया।

राम का राम राज्य

भगवान राम का राज्य “राम राज्य” के नाम से प्रसिद्ध है, जिसे आदर्श और समृद्ध राज्य के रूप में जाना जाता है। उनकी शासन ने सभी वर्गो को सम्मान दिया और उनका राज्य धार्मिक एवं सामाजिक समृद्धि के मूल में स्थापित था

“राम राज्य” भगवान राम के राज्य का आदर्श है, जिसे रामायण में प्रस्तुत किया गया है। राम राज्य एक समृद्ध, धार्मिक, न्यायपूर्वक, और संवेदनशील राज्य को दिखता है। यह एक आदर्श राज्य का उदाहरण है, जिसमें मर्यादा, और समृद्धि का संयुक्त प्रतिनिधित्वा होता है।

राम राज्य का उदाहरण रामायण में प्रस्तुत किया गया है, लेकिन इसका तत्परया एक आदर्श राज्य की प्रशंसा करने का है। भगवान राम का राज्याभिषेक और उनका राज्य भारतवर्षा में एक आदर्श स्थल बन गया, जहाँ धर्म और न्याय का पालन होता था। राम राज्य आज भी धार्मिक और राजनीतिक चिंतन का एक महत्वपूर्ण  हिस्सा है, जो लोगों को आदर्श समाज की ओर प्रेरित करता है।।

राम का अंतिम समय और वापसी

भगवान राम का अंतिम समय और उनकी वापस लौटने की घटनायें रामायण के उत्तर कांड में व्यक्त हैं। भगवान राम के अंतिम समय और उनकी वापस की कहानी इस प्रकार है:

अंतिम समय:

भगवान राम का अंतिम समय अयोध्या में ही हुआ। एक दिन, उनके भक्त भारद्वाज ऋषि ने उन्हें बताया की उनका अंत समय आया है और अब वे अपने असली स्वरूप में वैकुंठ धाम को जा रहे हैं। भगवान राम ने सभी को आशीर्वाद दिया और अपने भक्तों, वानरों, और देवियों के साथ वैकुंठ धाम की यात्रा की शुरुआत की।

वैकुंठ धाम की यात्रा:

भगवान राम, सीता, लक्ष्मण, हनुमान, और उनके अनुयायी वैकुंठ धाम की ओर चले गये। यह घटना रामायण के अनुयायी भक्तों के लिए एक दिव्या घटना है, जिसमें भगवान राम अपने अमित शक्तियों और परम दिव्यता में प्रकट होते हैं।

भगवान राम की दिव्या रूप दर्शन:

वैकुंठ धाम पहुँच कर, भगवान राम ने अपना दिव्या रूप प्रकट किया। उनके भक्त और वानर सेना ने उनका दिव्या रूप देख कर आनंदित होकर उनकी स्तुति की। भगवान राम ने अपने भक्तों को आशीर्वाद दिया और उनके साथ अलग-अलग रूप में ब्रह्मांड को देखा।

वैकुंठ धाम से अयोध्या लौटकर:

भक्तों की स्तुति और आशीर्वाद के बाद, भगवान राम ने अपने भक्तों, वानरों, और देवियों के साथ अयोध्या की ओर निकल गए। उनके साथ सीता, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्ना, हनुमान, और विभीषण भी थे। अयोध्या में पहुँच कर, उन्होने अपने भक्त भारद्वाज ऋषि और सभी अयोध्या वासियों को आशीर्वाद दिया।

इस प्रकार, भगवान राम का अंतिम समय वैकुंठ धाम में हुआ, और उनका दिव्या रूप दर्शन उनके भक्तों को आनंदित किया। रामायण के इस अंश से हमारा यह सिद्ध होता है की भगवान राम का जीवन, मर्यादा पुरुषोत्तम होने का आदर्श रखने के साथ-साथ, उनका दिव्या स्वरूप भी व्यक्त हुआ।

FAQ:

प्रश्न: भगवान राम का जन्म कहाँ हुआ था?

उत्तर: भगवान राम का जन्म अयोध्या नगरी में हुआ था। उनका जन्मस्थान ‘राम जन्मभूमि’ के रूप में प्रसिद्ध है।

प्रश्न: रामायण क्या है और इसमें भगवान राम का क्या महत्व है?

उत्तर: रामायण, महाऋषि वाल्मीकि द्वारा रचित एक प्राचीन हिंदू है, जिसमें भगवान राम के जीवन का वर्णन किया गया है। रामायण भगवान राम के आदर्श जीवन और धार्मिक तटवाओं को प्रस्तुत करती है।

प्रश्न: भगवान राम ने कैसे माता सीता से विवाह किया?

उत्तर: भगवान राम ने स्वयंवर में शिव धनुष को तोड़कर माता सीता से विवाह किया। इससे पहले उन्होने विश्वामित्रा के साथ मिथिला नगरी में राक्षसी तरका, मरीचा, और सुबाहु के साथ युद्ध किया था।

प्रश्न: भगवान राम का वनवास कैसे हुआ?

उत्तर: भगवान राम का वनवास दशरथ महाराज के वचन के अनुसार हुआ था। उन्होने 14 वर्ष का वनवास तय किया और इस दौरान उनका संघ मित्रा लक्ष्मण और माता सीता के साथ था।

प्रश्न: भगवान राम ने कैसे लंका को विजयी किया?

उत्तर: भगवान राम ने रावण का वध करके लंका को विजयी किया। इसके लिए उन्होने अपने भक्त हनुमान की मदद ली, जिन्होने माता सीता का पता लगाकर उन्हें बताया और उनका सहायता किया।

प्रश्न: भगवान राम का धार्मिक दृष्टिकोण क्या था?

उत्तर: भगवान राम एक आदर्श पति, पुत्रा, और राजकुमार थे। उनका धार्मिक दृष्टिकोण प्रेम, समर्पण, और धर्म पर आधारित था।

प्रश्न: भगवान राम और माता सीता के बीच में प्रेम कथा क्या है?

उत्तर: भगवान राम और माता सीता की प्रेम कथा उनके वचन और सहयोग पर आधारित है। उनका प्रेम एक दूसरे में विशेष प्रेम और समर्पण का उदाहरण है।

प्रश्न: भगवान राम का क्या संदेश है?

उत्तर: भगवान राम का संदेश धर्म, कर्तव्या, और सचाई पर आधारित है। उनका जीवन एक आदर्श जीवन का प्रतीक है।

प्रश्न: भगवान राम के चरित्र में कौन-कौन से प्रमुख पात्रा थे?

उत्तर: भगवान राम के चरित्रा में प्रमुख पात्रा श्री राम, माता सीता, लक्ष्मण, भरत, और हनुमान हैं, जो सबने अपने भक्ति और कर्तव्या में महत्वा दिया।

प्रश्न: भगवान राम की पूजा का क्या महत्वा है?

उत्तर: भगवान राम की पूजा भक्ति मार्ग में महत्वपूर्ण है। उनकी पूजा से भगत धार्मिक अनुष्ठान और प्रेम में विकास करते हैं, और उनके चरित्रा से प्रेरित होकर जीवन को सही दिशा में लेते हैं।

निष्कर्ष:

दोस्तों ऊपर दिए गए लेख में हमने आपको भगवान राम के जीवन के बारे में सभी बातों को विस्तार से बताया है। भारत के हिंदू धर्म में भगवान राम को महत्वपूर्ण देवों में से एक माना गया है। इनकी पूजा भारत के चारों तरफ होती हैं और उनकी श्रद्धा भी भक्तों में काफी ज्यादा है।

भगवान राम की जीवन के बारे में रामायण में बताया गया है, लेकिन रामायण से भी संक्षेप में आप इनके जीवन के बारे में जानना चाहते हैं तो ऊपर दिए गए लेख को ध्यान से पूरा पढ़े। इस लेख में हमने भगवान राम के जीवन के बारे में संक्षिप्त रूप से बताया है। उम्मीद करता हूं कि यह आपको पसंद आया होगा, धन्यवाद।

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